लखनऊ:
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश निवेश और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। सरकार की पारदर्शी नीतियों, अनुकूल वातावरण और समयबद्ध क्रियान्वयन के चलते प्रदेश अब तक 16,000 से अधिक निवेश परियोजनाओं को धरातल पर उतार चुका है। इनमें से 8,000 से अधिक परियोजनाओं में वाणिज्यिक संचालन प्रारंभ हो चुका है, जबकि शेष पर कार्य प्रगति पर है।
राज्य सरकार अब पांचवीं ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (GBC-5) की तैयारियों में जुट गई है, जिसका आयोजन नवंबर 2025 में किया जाना प्रस्तावित है। इस आयोजन के माध्यम से लगभग ₹5 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने का लक्ष्य तय किया गया है। वहीं आयोजन की तिथि तक यह आंकड़ा ₹10 लाख करोड़ तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
पहले भी हुआ शानदार निवेश आकर्षण
अब तक राज्य में दो ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) आयोजित हो चुके हैं। पहला समिट 2018 में हुआ, जिसमें ₹4.28 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। दूसरा समिट 2023 में रिकॉर्ड ₹33.50 लाख करोड़ के प्रस्ताव लेकर आया। इन प्रस्तावों के क्रियान्वयन के लिए चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी हैं।
निवेश का क्षेत्रवार विश्लेषण
उत्तर प्रदेश में आए निवेश प्रस्तावों में सबसे बड़ा हिस्सा विनिर्माण क्षेत्र का रहा है, जिसकी हिस्सेदारी 62.25% है। सेवा क्षेत्र में 28.09% निवेश हुआ है, जबकि शेष अन्य अवसंरचनात्मक और विविध क्षेत्रों में है।
GBC-5 से क्या बदलेगा?
GBC-5 न केवल निवेश को नई रफ्तार देगा, बल्कि प्रदेश को आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा के तहत एक मजबूत औद्योगिक और आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। यह आयोजन रोजगार के लाखों अवसरों के सृजन, स्थानीय उद्यमिता को प्रोत्साहन और समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।
इन प्रमुख कंपनियों ने किया निवेश
अब तक कई प्रमुख कंपनियों ने अपने निवेश को जमीन पर उतारकर प्रदेश की औद्योगिक छवि को और मजबूत किया है:
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वीवो (IT व इलेक्ट्रॉनिक्स) – ₹7,429 करोड़
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टोरेंट गैस (औद्योगिक विकास) – ₹2,751 करोड़
राज्य सरकार की 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस प्रणाली', औद्योगिक भूमि की आसान उपलब्धता, उत्कृष्ट कनेक्टिविटी और बेहतर कानून-व्यवस्था जैसे पहलुओं ने उत्तर प्रदेश को निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बना दिया है।