गोरखपुर एम्स के मानसिक रोग विभाग में तीन ऐसे मरीज मिले हैं जिनके दिमाग में पहुँच गया टीनिया सोलियम (टेपवर्म), पर मिर्गी का दौरा यानी झटका नहीं आया। आमतौर पर न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस में मरीज़ों को मिरगी के दौरे पड़ते हैं, लेकिन 28–50 वर्ष आयु वर्ग के इन शराबी मरीज़ों में लक्षण बदलकर गंभीर सिरदर्द, तनाव, मतिभ्रम, चलने-फिरने में दिक्कत, हस्तकम्प तथा दृष्टि दोष तक उतर आए।
क्या है न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस?
टीनिया सोलियम के अंडे गंदगी में रखी अधपकी सब्जियों या बिना धुले फल-तरकारी से शरीर में प्रवेश करते हैं। पेट में लार्वा बनकर ये कीड़े रक्त के साथ दिमाग तक पहुँचते हैं और न्यूरल टिश्यू को नष्ट कर मिरगी के दौरे और झटके पैदा करते हैं। हालांकि, शराब के अल्कोहल प्रभाव ने इस स्टडी के अनुसार इन तीन मरीज़ों में “झटका देना” ही भूलवा दिया।
अध्ययन का विवरण
इस शोध को इंडियन जनरल ऑफ साइकाइट्रिक (मई 2025) में प्रकाशित किया गया है। इसका नेतृत्व डॉ. मनोज पृथ्वीराज (विभागाध्यक्ष), एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रिचा त्रिपाठी, सीनियर रेज़ीडेंट डॉ. राशिद आलम व डॉ. हिना ने किया। तीनों मरीज़ों को 10–15 वर्षों से अल्कोहल की लत थी और साफ़-सफ़ाई के नियम नहीं माने जाने से संक्रमण हुआ माना जा रहा है। अब एम्स में अल्कोहल के दिमागी प्रभाव पर गहन अनुसंधान चल रहा है।