वॉशिंगटन, 24 जुलाई 2025
अमेरिका की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा पर देशद्रोह का गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। ट्रंप का दावा है कि ओबामा प्रशासन ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में उनके खिलाफ साजिश रची थी और अमेरिकी खुफिया जानकारी का गलत इस्तेमाल किया गया।
ट्रंप का बड़ा बयान: "यह देशद्रोह था"
मंगलवार को व्हाइट हाउस में फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर के साथ एक बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा:
“यह साफ है कि वह (ओबामा) दोषी हैं। उन्होंने चुनाव को उलझाने की कोशिश की। यह देशद्रोह है – उन्होंने ऐसे काम किए जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।”
ट्रंप का आरोप है कि 2016 चुनाव के दौरान ओबामा प्रशासन ने अमेरिकी जनता को जानबूझकर गुमराह किया और उनकी जीत को कमजोर करने की कोशिश की।
तुलसी गबार्ड का खुलासा: "रंगे हाथ पकड़ा गया ओबामा प्रशासन"
अमेरिका की डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस तुलसी गबार्ड ने भी ओबामा प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने बुधवार को गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक किए, जिनके अनुसार ओबामा प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने जानबूझकर रूस के हस्तक्षेप के आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया ताकि ट्रंप की वैधता को चुनौती दी जा सके।
गबार्ड का कहना है कि यह "एक लंबी और सुनियोजित साजिश थी" जिसका उद्देश्य सत्ता परिवर्तन के लिए तख्तापलट की जमीन तैयार करना था।
क्या था 2016 की साजिश का आधार?
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गबार्ड के अनुसार, ओबामा प्रशासन ने रूसी हस्तक्षेप को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया।
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ट्रंप को ‘रूसी समर्थन से जीता हुआ’ बताकर उनकी वैधता पर सवाल खड़े किए गए।
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CIA और अन्य एजेंसियों ने 2016 में यह निष्कर्ष निकाला कि रूस ने ट्रंप को फायदा पहुंचाने की कोशिश की थी।
हालांकि, 2019 में जारी स्पेशल काउंसिल रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रंप और रूस के बीच मिलीभगत का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला।
ओबामा की चुप्पी बनी रहस्य
इन गंभीर आरोपों पर बराक ओबामा की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप द्वारा ये आरोप 2024 में दोबारा चुनाव जीतने की उनकी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।
पृष्ठभूमि: चुनावों की वैधता पर पुराना विवाद
ओबामा के दूसरे कार्यकाल के अंतिम दिनों में अमेरिकी एजेंसियों ने रूस पर आरोप लगाया था कि वह अमेरिकी चुनाव प्रणाली को प्रभावित कर रहा है। ओबामा प्रशासन ने जवाब में रूसी राजनयिकों को निष्कासित किया और प्रतिबंध लगाए। लेकिन यह विवाद अब तक थमा नहीं है।