लखनऊ ब्यूरो | 18 जुलाई 2025
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने उत्तर प्रदेश में बड़े संगठनात्मक फेरबदल करते हुए 60 से अधिक जिला प्रचारकों को बदला है। यह बदलाव आगामी पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर बेहद अहम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, यह बदलाव आरएसएस की नियमित संगठनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसके पीछे जमीनी स्तर पर समन्वय को बेहतर बनाना और वैचारिक प्रभाव को मजबूत करना मुख्य उद्देश्य है।
आरएसएस पदाधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश के छह प्रांतों — पश्चिमी यूपी (उत्तराखंड सहित), ब्रज, अवध, गोरक्ष, काशी और बुंदेलखंड — में प्रत्येक में 10 से 15 जिला प्रचारकों के कार्यक्षेत्रों में परिवर्तन किया गया है।
क्यों अहम है ये बदलाव?
आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि
“संघ में पदाधिकारियों के स्थानांतरण एक निरंतर प्रक्रिया है जिसका मकसद उनकी दक्षता बढ़ाना और संगठन को और अधिक सक्रिय बनाना है। इस साल आरएसएस के शताब्दी वर्ष समारोह की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए यह फेरबदल और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।”
हालांकि, उन्होंने इस संभावना से इनकार नहीं किया कि यह बदलाव आगामी चुनावों से संबंधित हो सकते हैं।
“आरएसएस और भाजपा का वैचारिक समन्वय स्वाभाविक है। चुनावों से पहले यह तालमेल और सघन हो जाता है,” उन्होंने कहा।
2024 के परिणामों के बाद बदली रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में आरएसएस और भाजपा की सक्रियता 2024 के लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद और तेज हो गई है। वरिष्ठ पत्रकार कुमार पंकज का कहना है कि
“भाजपा को 2019 में यूपी से 62 सीटें मिली थीं, जो 2024 में घटकर 33 रह गईं। यह संघ और भाजपा, दोनों के लिए चेतावनी संकेत था। अब आरएसएस जमीनी ढांचे को फिर से मजबूत कर भाजपा को सहारा देने की रणनीति पर काम कर रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि
“उत्तर प्रदेश के 80 लोकसभा सीटें केंद्र की सत्ता में सबसे अहम भूमिका निभाती हैं। संघ भाजपा की रणनीति पर नजर रखता है, जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करता है और कार्यकर्ताओं के ज़रिए जनभावनाओं को प्रभावित करने का काम करता है।”
प्रचारकों की भूमिका क्या है?
आरएसएस में जिला प्रचारक संगठन की रीढ़ माने जाते हैं। ये कार्यकर्ताओं को संगठित करने, शाखाओं को सक्रिय रखने और सामाजिक व वैचारिक कार्यों को जमीन पर उतारने का काम करते हैं। उनकी बदली गई तैनाती से स्थानीय स्तर पर संघ की पहुंच और प्रभाव को नया आयाम देने की कोशिश की गई है।