वाराणसी | 18 जुलाई 2025
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कांवड़ियों के वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। वाराणसी में राष्ट्रीय जनजातीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ तत्व फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए कांवड़ यात्रियों को बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन वीडियो में कांवड़ यात्रियों को ढाबों, स्कूल बसों और निजी वाहनों में तोड़फोड़ करते हुए दिखाया जा रहा है, लेकिन इस तरह के मीडिया ट्रायल के पीछे एक खास मानसिकता काम कर रही है जो भारत की आस्था और सांस्कृतिक विरासत को बदनाम करना चाहती है।
"कांवड़ियों को उपद्रवी और आतंकवादी कहने का दुस्साहस"
सीएम योगी ने दो टूक कहा—
"कुछ लोग कांवड़ियों को उपद्रवी और आतंकवादी तक कहने का दुस्साहस कर रहे हैं। यह मानसिकता वही है जो भारत की विरासत और जनजातीय समाज को लगातार अपमानित करने की कोशिश करती रही है।"
उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा आज एकता और भक्ति का प्रतीक बन चुकी है, जिसमें किसी जाति, मत, संप्रदाय या वर्ग का भेदभाव नहीं होता।
"हर-हर बम-बम करते हुए लोग सैकड़ों किलोमीटर पैदल यात्रा कर जल लाते हैं और शिव को अर्पित करते हैं। फिर भी उन्हें बदनाम किया जा रहा है।"
मुहर्रम और कांवड़ यात्रा की तुलना
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले मुहर्रम के जुलूसों में अराजकता, आगजनी और तोड़फोड़ आम बात थी। लेकिन उनकी सरकार ने ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया है और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखा है।
"हमने स्पष्ट किया है कि किसी भी धार्मिक आयोजन में अस्त्र-शस्त्र का प्रदर्शन नहीं होगा। यह हमारी व्यवस्था की पारदर्शिता और संवेदनशीलता का परिचायक है।"
जनजातीय समाज पर विशेष जोर
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने भारत के जनजातीय समाज की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह वही समाज है जिसने
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त्रेता युग में भगवान राम का साथ दिया,
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महाराणा प्रताप की सेना को पुनर्गठित करने में मदद की,
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और ब्रिटिश शासन के खिलाफ बिरसा मुंडा के नेतृत्व में आंदोलन किया।
सीएम योगी ने कहा—
"जनजातीय समाज भारत की सनातन परंपरा का सच्चा प्रतिनिधि है। यह समाज प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर वेदों की शिक्षाओं को जीता है।"
पिछली सरकारों पर निशाना
योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सरकारों को जनजातीय समाज की उपेक्षा का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले तक
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कई जनजातीय गांव राजस्व ग्राम नहीं थे,
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उन्हें मतदान का अधिकार तक नहीं मिला था,
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लेकिन उनकी सरकार ने उन्हें राशन, जमीन के पट्टे, पेंशन जैसी मूलभूत सुविधाएं दीं।
“जहां संवाद नहीं होता, वहां संघर्ष होता है। हमारी सरकार संवाद को प्राथमिकता देती है, ताकि जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।”
समापन में धर्म और सहिष्णुता की बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की परंपरा कभी भी आस्था पर आधारित पहचान को सीमित नहीं करती।
“जो वेदों को माने वो भी हिंदू है, और जो न माने, वह भी हिंदू है। चार्वाक और बुद्ध जैसे विचारक हमारे लिए पूज्य हैं, भले उन्होंने वेदों को न माना हो।”