पटना।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की सक्रियता चर्चा में है। उनके बयानों और राजनीतिक रुख को देखते हुए एक बार फिर साल 2020 के चर्चित नारे ‘मोदी जी से बैर नहीं, नीतीश तेरी खैर नहीं’ की गूंज सुनाई दे रही है।
2025 के विधानसभा चुनाव को लेकर बिहार की सियासत में हलचल है, और इस हलचल के केंद्र में हैं चिराग पासवान। एनडीए में शामिल होने और केंद्र में मंत्री बनने के बावजूद चिराग जिस तरह से नीतीश कुमार सरकार पर हमलावर हैं, उससे यह सवाल उठ खड़ा हुआ है – क्या चिराग एक बार फिर उसी रणनीति पर काम कर रहे हैं जिसने 2020 में JDU को भारी नुकसान पहुंचाया था?
2020 की यादें: नीतीश को झटका, BJP को फायदा
2020 के विधानसभा चुनाव में चिराग पासवान ने नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपनी पार्टी को एनडीए से अलग कर लिया था। उन्होंने 137 सीटों पर JDU के खिलाफ उम्मीदवार उतारे लेकिन BJP के खिलाफ एक भी प्रत्याशी नहीं उतारा। नतीजा ये हुआ कि JDU की सीटें 115 से घटकर 43 रह गईं, जबकि BJP 74 सीटें जीतकर मजबूत स्थिति में आ गई।
चिराग की यह रणनीति नीतीश कुमार को कमजोर करने में कामयाब रही, और BJP को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिला। हालांकि LJP को केवल एक सीट से संतोष करना पड़ा, लेकिन चिराग की राजनीतिक उपयोगिता BJP को भलीभांति समझ में आ गई।
2025 में फिर पुराना फॉर्मूला?
2024 के लोकसभा चुनाव में चिराग की पार्टी को पांच में से पांच सीटें मिलीं, जिससे केंद्र सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। अब जबकि 2025 का विधानसभा चुनाव करीब है, चिराग के बयानों से संकेत मिल रहे हैं कि वह एक बार फिर नीतीश कुमार को राजनीतिक चक्रव्यूह में घेरने की तैयारी में हैं।
बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर चिराग लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला बोल रहे हैं।
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नालंदा में हुए दोहरे हत्याकांड पर उन्होंने कहा कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
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पटना में व्यवसायी की हत्या पर उन्होंने नीतीश सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
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मुजफ्फरपुर में दलित बच्ची के साथ दुष्कर्म व हत्या पर उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा और घटना को राज्य की सामाजिक और संवैधानिक विफलता बताया।
मांझी की तुलना – "चिराग हैं अभिमन्यु"
एनडीए सहयोगी और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी ने चिराग पासवान की तुलना महाभारत के अभिमन्यु से की है। उनका कहना है कि चिराग युवा हैं और शासन की जटिलताओं को पूरी तरह नहीं समझ पाते। हालांकि मांझी ने यह भी कहा कि चिराग NDA के अच्छे नेता हैं, लेकिन उनकी शैली से कभी-कभी भ्रम पैदा होता है।
BJP की ‘चुप्पी’ और ‘रणनीति’
चिराग के लगातार हमलों पर BJP नेतृत्व की चुप्पी भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि BJP ‘चुनिंदा चुप्पी’ के साथ चिराग को आगे बढ़ा रही है ताकि नीतीश कुमार को अंदर से कमजोर किया जा सके। इससे BJP को दोहरा फायदा मिल सकता है —
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नीतीश कुमार के वोट बैंक में सेंध
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दलित और महादलित वोटों का ध्रुवीकरण चिराग के पक्ष में
बिहार में दलित वोट लगभग 19% हैं, जिसमें पासवान समुदाय की भागीदारी लगभग 5-6% है। हाल ही में राजगीर में हुए बहुजन संकल्प समागम में कई दलित समूहों ने चिराग के साथ खड़े होने का संकेत दिया।
चिराग के इशारे: अप्रत्यक्ष हमला
चिराग ने हाल में कहा था – "कई लोग मेरे बिहार लौटने से घबरा रहे हैं, और रास्ते में बाधाएं डाल रहे हैं"। ये बयान भी नीतीश कुमार और JDU के खिलाफ अप्रत्यक्ष रूप से माना गया। उनके करीबी अरुण भारती का बयान भी इसी लाइन में था, जहां उन्होंने कहा – "राष्ट्र के लिए आप धृतराष्ट्र नहीं बन सकते।"
BJP की लंबी रणनीति
नीतीश कुमार के बाद JDU में नेतृत्व का संकट है। BJP की रणनीति यही दिखती है कि नीतीश के बाद JDU के वोटर इधर-उधर न हों, बल्कि सीधे BJP की तरफ शिफ्ट हो जाएं। इसके लिए चिराग पासवान को "दलित चेहरा" बनाकर उभारना एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है।