देहरादून – देश की सेवा का सपना लेकर डिफेंस प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे एक युवक का सपना उस वक्त चकनाचूर हो गया जब कोचिंग संस्थान के एक शिक्षक ने उसे ऐसी सजा दी, जिससे वह शारीरिक रूप से भर्ती के अयोग्य हो गया। आरोप है कि कक्षा में बातचीत करने पर शिक्षक ने छात्र को 400 उठक-बैठक लगाने की सजा दी, जिससे उसके लिगामेंट खराब हो गए और वह कई दिनों तक बिस्तर पर पड़ा रहा।
यह मामला देहरादून के सेंचुरियन डिफेंस एकेडमी, बल्लूपुर चौक का है, जहां शिलांग (मेघालय) निवासी बानजीत कुमार बर्मन के 18 वर्षीय पुत्र ने कोचिंग में दाखिला लिया था।
शिक्षक पर आरोप, पुलिस ने दर्ज किया केस
बसंत विहार थाना प्रभारी प्रदीप रावत के मुताबिक, पीड़ित छात्र के पिता की शिकायत पर गणित शिक्षक जय सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोप है कि 4 जुलाई को कक्षा में बातचीत करने पर शिक्षक ने छात्र को 400 बार उठक-बैठक लगाने को मजबूर किया।
इस सजा से छात्र को पैरों और कमर में असहनीय दर्द, सूजन और मांसपेशियों में खिंचाव हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि छात्र कई दिनों तक चल भी नहीं पाया। पीजी संचालक की मदद से उसे एक हड्डी रोग विशेषज्ञ के पास ले जाया गया, जहां उसे दर्द निवारक दवाएं, सूजन-रोधी इंजेक्शन और पट्टियां दी गईं।
एकेडमी ने मांगी माफी, फिर किया नजरअंदाज
छात्र के पिता ने 10 जुलाई को एकेडमी को ईमेल भेजकर घटना की जानकारी दी और कार्रवाई की मांग की। जवाब में संस्थान ने माफी तो मांगी, लेकिन आरोप है कि बाद में उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
इसके उलट, एकेडमी के प्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवार से कथित रूप से आक्रामक लहजे में बात की और छात्र को फिर से दस्तावेज़ सत्यापन के लिए बुलाया, जबकि उसकी प्रवेश प्रक्रिया अप्रैल में पूरी हो चुकी थी।
शारीरिक नुकसान से टूटा सपना
पीड़ित पिता का कहना है कि इस कठोर शारीरिक दंड ने उनके बेटे को डिफेंस भर्ती के लिए अयोग्य बना दिया है। उनका दावा है कि लिगामेंट डैमेज की वजह से अब बेटा कभी भी सेना में शामिल नहीं हो सकेगा।
घटना से आहत पिता ने पहले शिलांग पुलिस को शिकायत दी, जहां से जीरो FIR दर्ज कर मामला देहरादून पुलिस को सौंपा गया। बसंत विहार थाना पुलिस अब मामले की जांच कर रही है। मंगलवार को पुलिस ने संबंधित कोचिंग संस्थान पहुंचकर जानकारी जुटाई।
यह मामला छात्रों के साथ कोचिंग संस्थानों में बरती जा रही गैर-जिम्मेदाराना सख्ती और अनावश्यक शारीरिक दंड पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
👉 क्या शिक्षक को अधिकार है कि वह किसी छात्र का भविष्य छीन ले?
👉 क्या अब शारीरिक दंड की आड़ में छात्रों का शोषण हो रहा है?