Shopping cart

Subtotal: $4398.00

View cart Checkout

Magazines cover a wide subjects, including not limited to fashion, lifestyle, health, politics, business, Entertainment, sports, science,

राज्य

श्रीनगर में शहीदों के स्मारक पर उमर अब्दुल्ला की श्रद्धांजलि रोकने पर हंगामा, दीवार फांदकर पहुंचे अंदर

Blog Image
903 0

श्रीनगर | 13 जुलाई 2025
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के नेता उमर अब्दुल्ला रविवार सुबह श्रीनगर स्थित शहीदों के कब्रिस्तान (मजार-ए-शुहदा) में 13 जुलाई 1931 के शहीदों को श्रद्धांजलि देने पहुंचे, जहां उन्हें पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद तनावपूर्ण माहौल बन गया।
स्थिति तब और गरम हो गई जब उमर अब्दुल्ला दीवार पर चढ़कर स्मारक के अंदर प्रवेश कर गए और श्रद्धांजलि अर्पित की।


"मुझे रोका नहीं जा सकता" — उमर अब्दुल्ला

उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा:

"यह वो शारीरिक हाथापाई है जिसका मुझे सामना करना पड़ा, लेकिन मैं मजबूत शरीर का बना हूं और मुझे रोका नहीं जा सकता था।"

उन्होंने कहा कि वे कोई गैरकानूनी कार्य नहीं कर रहे थे, बल्कि शहीदों को फातिहा पढ़ने गए थे।

"इन 'कानून के रक्षकों' को बताना होगा कि किस कानून के तहत हमें श्रद्धांजलि देने से रोका गया।"


क्यों मनाई जाती है 13 जुलाई की वर्षगांठ?

13 जुलाई 1931 को डोगरा शासन के खिलाफ आवाज उठाने वाले 22 कश्मीरियों की महाराजा हरि सिंह की सेना द्वारा गोलीबारी में हत्या कर दी गई थी
वे लोग श्रीनगर जेल के बाहर अब्दुल कादिर की सुनवाई के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
यह दिन कश्मीर में राजनीतिक चेतना की शुरुआत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बीज बोने वाला माना जाता है।


कार्यक्रमों पर रोक और नजरबंदी के आरोप

गौरतलब है कि एक दिन पहले ही उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाली प्रशासन ने 13 जुलाई की वर्षगांठ से संबंधित सभी राजनीतिक कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

NC के नेताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें नजरबंद कर दिया गया ताकि वे इस कार्यक्रम में भाग न ले सकें।

2020 में प्रशासन द्वारा इस दिन को गजेटेड हॉलिडे की सूची से हटाया गया, जिस पर क्षेत्रीय दलों ने कड़ी आपत्ति जताई थी।


नौहट्टा चौक से पैदल मार्च

पाबंदी के बावजूद, उमर अब्दुल्ला अपने समर्थकों और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ नौहट्टा चौक से स्मारक तक पैदल मार्च करते हुए पहुंचे।
पुलिस और प्रशासन ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके चलते धक्का-मुक्की और तेज बहस की स्थिति बन गई।


राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

NC नेताओं और समर्थकों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन के रूप में देखा, जबकि प्रशासन ने इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बताया।

सियासी गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है कि क्या श्रद्धांजलि देने जैसे आयोजनों को भी सियासी प्रतिबंधों में लाना सही है?

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post