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G-7 समिट में पहली बार आमने-सामने होंगे ट्रंप और पीएम मोदी? सीजफायर विवाद के बाद दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात पर निगाहें

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📍 नई दिल्ली/कनाडा
भारत और अमेरिका के रिश्तों के लिहाज से G-7 समिट का मौजूदा संस्करण बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 16-17 जून को कनाडा के कनानास्किस में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। खास बात यह है कि इसी मंच पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी मौजूद रहेंगे। ऐसे में भारत-पाकिस्तान सीजफायर पर विवादास्पद टिप्पणी करने वाले ट्रंप और पीएम मोदी की संभावित मुलाकात को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

ट्रंप के सीजफायर दावे पर भारत का विरोध

गौरतलब है कि अमेरिका के  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक दबाव बनाकर सीजफायर कराने में अहम भूमिका निभाई। ट्रंप ने यह बयान इजरायल-ईरान तनाव के दौरान भी दोहराया और कहा कि वे उसी तरह वहां भी सीजफायर करा सकते हैं।

हालांकि भारत ने ट्रंप के इस बयान को पूरी तरह खारिज किया है। भारत का कहना है कि सीजफायर पाकिस्तान की कमजोरी और भारत की जवाबी कार्रवाई का नतीजा था, किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का इसमें कोई योगदान नहीं था।

क्या G-7 में होगी ट्रंप-मोदी मुलाकात?

हालांकि विदेश मंत्रालय की ओर से पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की किसी आधिकारिक द्विपक्षीय मुलाकात की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों का मानना है कि दोनों नेता सम्मेलन के इतर संभवतः एक ही मंच पर नजर आएंगे। यह पीएम मोदी का ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहला अंतरराष्ट्रीय दौरा है, और ऐसे में इस मंच से भारत को अपनी विदेश नीति का पक्ष मजबूत करने का एक सुनहरा मौका मिल सकता है।

आतंकवाद, सीजफायर और कश्मीर पर भारत का रुख होगा साफ

प्रधानमंत्री मोदी इस मंच से साफ कर सकते हैं कि भारत कश्मीर मुद्दे पर किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करता। अब पाकिस्तान के साथ बातचीत का मुद्दा केवल पीओके की वापसी रहेगा, न कि कश्मीर। भारत ने साफ कहा है कि भविष्य में किसी भी आतंकी हमले के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान की सेना को जिम्मेदार ठहराया जाएगा और जवाब उसी तरह दिया जाएगा – इसे प्रॉक्सी वॉर नहीं, सीधी जंग मानी जाएगी।

टैरिफ विवाद और रक्षा सहयोग भी रहेगा एजेंडे में

G-7 समिट के दौरान पीएम मोदी वैश्विक नेताओं के साथ रक्षा तकनीक, हथियारों की खरीद और तकनीकी साझेदारी  जैसे अहम मुद्दों पर भी चर्चा कर सकते हैं। अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद भी दोनों देशों के बीच चर्चा का केंद्र रह सकता है। ट्रंप ने पहले भारत के "हाई टैरिफ" की आलोचना करते हुए रेसिप्रोकल पॉलिसी लागू करने की बात कही थी। भारत ने कुछ टैरिफ में कटौती की है, लेकिन अब तक इस मसले पर कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।

ऑपरेशन सिंदूर की छाप

G-7 का यह सम्मेलन भारत के लिए ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपनी सैन्य शक्ति और रणनीतिक स्थिति को दुनिया के सामने रखने का एक बड़ा मंच है। भारत इस मंच से यह संदेश भी दे सकता है कि वह आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और आत्मनिर्भर रक्षा नीति के मामले में अब समझौता नहीं करेगा।

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