आगरा।
मध्यप्रदेश और राजस्थान में जारी भारी बारिश का प्रभाव अब उत्तर प्रदेश के चंबल क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण चंबल नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच चुकी है, जिससे आगरा जिले के पिनाहट और बाह तहसील के सात गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट गया है।
तेज बहाव और जलभराव के चलते गांवों के रास्ते जलमग्न हो गए हैं। ग्रामीण टापुओं पर फंसे हैं, और लगातार 38 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
बाढ़ का आंकड़ा:
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जलस्तर: 127 मीटर (खतरे का निशान: 130 मीटर)
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रविवार को छोड़ा गया पानी: 2.90 लाख क्यूसेक (कोटा बैराज से)
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सोमवार रात पिनाहट में बहाव: अनुमानित 6.50 लाख क्यूसेक
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प्रभावित गांव: पिनाहट के रेहा, डंगोरा, कछियारा और बाह के गुढ़ा, गौहरा, झरनापुरा, रानीपुरा
हालात गंभीर: रास्ते कटे, ग्रामीण छतों पर रातें गुजारने को मजबूर
नदी का जलस्तर मंगलवार शाम को 127 मीटर पार कर गया, जो बाढ़ चेतावनी स्तर है।
ग्रामीणों ने पशुओं और जरूरी सामान को ऊंचे टीलों पर पहुंचा दिया है। कई लोग घर की छतों पर परिवार सहित रातें जागकर काट रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पानी रातोंरात गांवों में घुस आता है, जिससे हर साल जीवन और संपत्ति को भारी नुकसान होता है।
प्रशासन सतर्क: बाढ़ चौकियां, अधिकारी तैनात
जिला प्रशासन ने पिनाहट, बासोनी, मनसुखपुरा, उमरैठा, खेड़ा राठौर, सिमराई, नंदगंवा और भगवानपुरा में बाढ़ चौकियां स्थापित की हैं।
इन जगहों पर लेखपाल और कानूनगो को तैनात किया गया है और उन्हें रियल-टाइम रिपोर्टिंग के निर्देश दिए गए हैं।
सिंचाई विभाग के अनुसार यदि बारिश इसी तरह जारी रही तो चंबल नदी का जलस्तर खतरे के निशान 130 मीटर को पार कर सकता है।
पंप हाउस की सुरक्षा: वर्ष 2022 की त्रासदी से सबक
जैसे ही जलस्तर 127 मीटर पार हुआ, सिंचाई विभाग ने पंप हाउस नंबर एक की मशीनों को बचाने के लिए अस्थायी सुरक्षा दीवार बनानी शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में बाढ़ का पानी पंप हाउस में घुस गया था, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था।
खतरे में गांव:
चंबल तटवर्ती जो 38 गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं, उनमें शामिल हैं:
उमरैठा पुरा, गुढ़ा, गौहरा, भटरपुरा, रानीपुरा, डालपुरा, झरनापुरा, रैहा, बरैंडा, डोंगरा, सिमराई, क्योरी, ऊपरी पुरा, बासोनी, भगवानपुरा आदि।