नई दिल्ली | 14 जुलाई 2025 — सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसमें दिल्ली के छोटे-छोटे स्कूली बच्चे कीचड़, गंदगी और जलभराव के बीच स्कूल पहुंचने की जद्दोजहद करते दिख रहे हैं।
वीडियो में बच्चों की सादगी भरी लेकिन सपाट और सटीक आवाज़, सीधा दिल्ली की बीजेपी सरकार और उसके मंत्रियों से सवाल करती है:
"क्या हमारी आवाज़ आप तक पहुंचेगी?"
ये सवाल सिर्फ सड़क कीचड़ से भरे रास्तों का नहीं है — ये सवाल उस सिस्टम पर है जिसने बच्चों के हाथों से किताबें छीनकर उन्हें चुनावी नारों की भीड़ में खो दिया है।
जब बच्चों को कलम नहीं, कीचड़ मिला
वीडियो में दिखाई देता है कि कैसे बच्चे बारिश के बाद कीचड़ भरे रास्तों से स्कूल जाने को मजबूर हैं। सालों से यही स्थिति बनी हुई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और सरकार का कोई ध्यान नहीं।
ना नालियों की सफाई हुई, ना सड़क बनी, ना स्कूल तक पहुँचने लायक रास्ता।
क्या कलम की जगह हथियारों की राजनीति हावी हो गई है?
वीडियो में एक सवाल और तीर की तरह उभरता है:
"क्या इन बच्चों को नहीं पता कि अब कलम-किताब की जगह हथियार पकड़ाने वाली सियासत हावी है?"
यह तंज सिर्फ सत्ता पर नहीं, हम सभी पर है — उन वोटरों पर जो शिक्षा, स्वास्थ्य, और विकास की जगह धर्म, नफ़रत और उन्माद पर वोट देते हैं।
नेता के बच्चे नहीं झेलते गंदगी, झुग्गी और टूटी स्कूल की मार
"कुर्सी मिलते ही कोई हमारी झुग्गी तोड़ता है, तो कोई हमारे स्कूल..."
ये आरोप सिर्फ बयान नहीं, गरीब और कमजोर वर्ग की दशकों से उपेक्षित हकीकत है।
जनता ने चुनना था, चूक गई — और उसकी सज़ा अब वही बच्चे भुगत रहे हैं जो स्कूल जाना चाहते हैं लेकिन रास्ते उन्हें जाने नहीं देता।