राष्ट्रपति ने इस्तीफा किया स्वीकार, विपक्ष ने जताई आशंका – “मामला सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं”
भारत के 14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई की रात अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मंगलवार (22 जुलाई) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया। राज्यसभा में पीठासीन सदस्य घनश्याम तिवाड़ी ने यह जानकारी दी।
धनखड़ मंगलवार को संसद की कार्यवाही में भी शामिल नहीं हुए और न ही विदाई समारोह में जाने की बात कही गई। उनके इस्तीफे के बाद जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना की, वहीं विपक्ष ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
इस्तीफे के पीछे दो थ्योरी
थ्योरी 1:
धनखड़ ने राष्ट्रपति को दिए इस्तीफे में स्वास्थ्य कारणों को पद त्यागने की वजह बताया।
थ्योरी 2:
कांग्रेस नेता जयराम रमेश समेत विपक्षी दलों का कहना है कि "ये सिर्फ स्वास्थ्य का मामला नहीं है।" उन्होंने दावा किया कि 21 जुलाई को दिन में धनखड़ ने राज्यसभा BAC बैठक की अध्यक्षता की, लेकिन शाम की दूसरी बैठक में जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू नहीं पहुंचे – और उन्हें इसकी कोई सूचना नहीं दी गई।
इसके तुरंत बाद बैठक टाल दी गई और उसी रात उन्होंने इस्तीफा दे दिया। विपक्ष का मानना है कि बैठक के बीच कुछ ऐसा हुआ जो बेहद गंभीर था।
विपक्ष के तीखे बयान
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जेबी माथेर (कांग्रेस): "यह बहुत चौंकाने वाला है, आज सुबह तक उन्होंने सदन चलाया।"
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दानिश अली (कांग्रेस): "यह सिर्फ स्वास्थ्य का मामला नहीं लगता, भाजपा नेताओं से मतभेद की खबरें थीं।"
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सुखदेव भगत (कांग्रेस): "राजनीति में कुछ भी अचानक नहीं होता। बिहार चुनाव नजदीक हैं, यह उसकी तैयारी हो सकती है।"
महाभियोग और कार्यकाल की चुनौती
धनखड़ भारत के पहले ऐसे उपराष्ट्रपति बने जिनके खिलाफ दिसंबर 2024 में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, हालांकि वह तकनीकी आधार पर खारिज हो गया। विपक्ष लगातार उन पर पक्षपात और विपक्षी आवाजों को दबाने का आरोप लगाता रहा।
उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक का था, लेकिन वे उसे पूरा नहीं कर सके। उनके राजनीतिक जीवन में विधायक के तौर पर 5 साल का कार्यकाल ही पूर्ण रहा।