Shopping cart

Subtotal: $4398.00

View cart Checkout

Magazines cover a wide subjects, including not limited to fashion, lifestyle, health, politics, business, Entertainment, sports, science,

मध्य प्रदेश

इंदौर में 7वीं के छात्र की खुदकुशी: फ्री फायर गेम में ₹2800 हारने के बाद डर के चलते उठाया ये कदम

Blog Image
900 0

इंदौर के एमआईजी थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। अनुराग नगर में रहने वाले 13 वर्षीय अंकलन जैन, जो कक्षा 7वीं का छात्र था, ने गुरुवार रात फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अंकलन ने फ्री फायर जैसे ऑनलाइन गेम में 2800 रुपये गंवा दिए थे, जिसके चलते वह मानसिक तनाव में था। उसे डर था कि जब माता-पिता को इस नुकसान का पता चलेगा, तो वे नाराज होंगे। इसी डर और अपराधबोध में उसने यह कठोर कदम उठाया।

परिवार में पसरा मातम, दादा ने सबसे पहले देखा शव

गुरुवार रात अंकलन ने अपने घर में ही फांसी लगाई। सबसे पहले उसके दादा ने उसे फंदे पर लटका देखा, जिसके बाद तत्काल परिजन उसे डीएनएस अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेजा गया। दुख की इस घड़ी में परिजनों ने साहस दिखाते हुए बेटे के नेत्रदान का noble फैसला लिया।

गेम से जोड़ा था मां का डेबिट कार्ड

टीआई सीबी सिंह ने जानकारी दी कि अंकलन के पास एक बिना सिम वाला मोबाइल था, जो वाई-फाई से कनेक्ट था। उसने गेमिंग ऐप से अपनी मां अपूर्वा जैन का डेबिट कार्ड लिंक कर रखा था, जिससे ₹2800 की राशि ट्रांजैक्ट हुई। जब उसने यह बात मां को बताई, तो डर और तनाव में आकर उसने आत्महत्या कर ली।

व्यापारी परिवार से था अंकलन

अंकलन के पिता अंकेश जैन ऑटो पार्ट्स के व्यापारी हैं। उनकी दुकान छोटी ग्वालटोली और देवास नाके पर है। परिवार में एक छोटा बेटा भी है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है।


डिजिटल डिटॉक्स की ज़रूरत: बच्चों को दें सही दिशा

इस घटना ने एक बार फिर माता-पिता को चेताया है कि बच्चों को डिजिटल दुनिया से कैसे सुरक्षित रखा जाए। नीचे कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:

  • 1 वर्ष तक के बच्चों को मोबाइल से पूरी तरह दूर रखें।

  • बच्चों को स्क्रीन के दुष्प्रभावों के बारे में प्यार से समझाएं।

  • मोबाइल में टाइमर लगाकर गेमिंग टाइम सीमित करें।

  • डाइनिंग टेबल और बेडरूम को नो-मोबाइल ज़ोन बनाएं।

  • ऐसे ऐप्स लॉक करें जो बच्चों को ज़्यादा देर तक स्क्रीन पर रखें।

  • बच्चों को माइंड गेम्स, कहानी-कला या फिजिकल एक्टिविटीज में शामिल करें।

  • हर दो घंटे में डिजिटल ब्रेक और परिवार के साथ समय बिताने का नियम बनाएं।

यह दुखद घटना न केवल माता-पिता के लिए चेतावनी है, बल्कि समाज को भी सोचने पर मजबूर करती है कि कैसे हम बच्चों की डिजिटल परवरिश में भागीदार बनें।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post