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दिल्ली

गाजियाबाद फर्जी दूतावास मामला: दुबई से लंदन तक फैला ठगी का जाल, हर्षवर्धन जैन ने ऐसे रचा ‘कूटनीतिक’ धोखे का साम्राज्य

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गाजियाबाद में फर्जी दूतावास खोलने वाले मास्टरमाइंड हर्षवर्धन जैन को लेकर एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। फिलहाल वह एसटीएफ की गिरफ्त में है, और पूछताछ में उसने जो राज खोले हैं, वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले ठगी के नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।

लंदन में एमबीए, दुबई में कंपनियां, भारत में फर्जी दूतावास

47 वर्षीय हर्षवर्धन जैन एक प्रतिष्ठित उद्योगपति परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता जे.डी. जैन, जैन रोलिंग मिल (गाजियाबाद) के मालिक और राजस्थान में मार्बल माइनिंग व्यवसाय से जुड़े हुए थे। पिता की मदद से हर्षवर्धन ने गाजियाबाद से बीबीए और लंदन से एमबीए की पढ़ाई की।

इसी दौरान हर्षवर्धन का लंदन और फिर दुबई से संपर्क गहरा हुआ। 2000 के दशक की शुरुआत में वह चर्चित विवादित हस्ती चंद्रास्वामी के संपर्क में आया, जिसने उसे दुबई के हथियार डीलर अदनान खरगोशी और एहसान अली सैयद से मिलवाया। इन लोगों के साथ मिलकर हर्षवर्धन ने लंदन में दर्जनों कंपनियां बनाई और दलाली और ठगी का धंधा शुरू कर दिया।

दुबई में फर्जी कंपनियों से शुरू की अंतरराष्ट्रीय ठगी

2006 में हर्षवर्धन अपने चचेरे भाई के पास दुबई चला गया, जहां हैदराबाद के शफीक और दुबई के इब्राहिम अली बन शारमा के साथ मिलकर उसने कई कंपनियां खड़ी कीं। इन कंपनियों के ज़रिए लोगों को विदेशों में नौकरियां दिलाने के नाम पर ठगी और दलाली की योजनाएं चलाई गईं।

भारत में रचा ‘डिप्लोमैटिक’ धोखे का जाल

2011 में भारत लौटने के बाद, हर्षवर्धन ने खुद को अलग-अलग माइक्रोनेशन (काल्पनिक देश) का राजदूत घोषित करना शुरू किया। उसने दावा किया कि उसे SEBORGA, West Antarctica और POULBIA LODONIA जैसी काल्पनिक जगहों का अवैतनिक एम्बेसडर बनाया गया है।

उसने गाजियाबाद में बाकायदा एक फर्जी दूतावास खोला, जहां से लोगों को झूठे वादों और फर्जी कागजातों के आधार पर विदेश भेजने के नाम पर ठगा जाता था। इस खेल में हर्षवर्धन ने फर्जी डिप्लोमैटिक पासपोर्ट, गाड़ियां, और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के साथ नकली तस्वीरें दिखाकर लोगों को भ्रमित किया।

अब एसटीएफ की हिरासत में

एसटीएफ द्वारा की गई पूछताछ में हर्षवर्धन ने इन सभी गतिविधियों को स्वीकार किया है। पुलिस अब उसके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की तह में जाकर जांच कर रही है।

यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की ठगी नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले एक संगठित धोखाधड़ी के नेटवर्क का पर्दाफाश है, जिसने शिक्षा, प्रतिष्ठा और तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को झांसे में लिया।


इस घटना से एक बार फिर सवाल उठता है: कैसे एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति, जो संपन्न परिवार से आता है, अपराध के रास्ते पर इस हद तक जा सकता है?

यदि आप भी किसी डिप्लोमैटिक या विदेश नौकरी के वादे के झांसे में हैं, तो सतर्क रहें — और किसी भी वेरिफिकेशन के बिना कोई कदम न उठाएं।

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