मंदसौर, मध्य प्रदेश | 31 जुलाई 2025:
"बैंड, बाजा और अर्थी" — ये शब्द सुनने में भले ही विरोधाभासी लगें, लेकिन मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में एक दोस्त ने अपने मित्र की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए अर्थी के आगे नाचकर एक अनोखी मिसाल पेश की है।
यह मार्मिक और अप्रत्याशित दृश्य ग्राम जवासिया में देखने को मिला, जहाँ अंबालाल प्रजापत नाम के व्यक्ति ने अपने करीबी मित्र सोहनलाल जैन की अंतिम यात्रा में बैंड-बाजे के साथ नाचते हुए हिस्सा लिया।
चाय की दुकान से शुरू हुई थी दोस्ती
अंबालाल और सोहनलाल की दोस्ती वर्षों पहले एक चाय की दुकान पर शुरू हुई थी। धीरे-धीरे दोनों सुख-दुख के साथी बन गए। कैंसर से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद जब 30 जुलाई को सोहनलाल जैन का निधन हुआ, तो गमगीन माहौल के बीच अंबालाल को दोस्त का लिखा एक पत्र मिला।
इस पत्र में लिखा था:
"मुझसे जाने-अनजाने में कोई गलती हुई हो तो क्षमा करना। मेरी आखिरी इच्छा है कि मेरी अर्थी के आगे मेरा दोस्त अंबालाल नाचे। राम-राम।"
बाजे पर थिरका दोस्त, गांव हुआ भावुक
सोहनलाल की अंतिम इच्छा पढ़ने के बाद अंबालाल ने गांववालों के विरोध के बावजूद डीजे मंगवाया और अर्थी के आगे नाचते हुए श्मशान तक पहुंचे। उन्होंने कहा:
"मन में पीड़ा बहुत है, लेकिन दोस्त की आखिरी इच्छा को पूरा करना मेरा फर्ज था।"
अंबालाल ने नाचते हुए कोई आंसू नहीं बहाया, लेकिन उनका हर कदम दोस्त के प्रति सम्मान और प्रेम का प्रतीक था।
लोगों ने देखा मूकदर्शक बनकर, वीडियो हुआ वायरल
गांव के कई लोगों ने अंबालाल को रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे लाल शर्ट पहनकर पूरे जोश से नाचते हुए दिखाई दे रहे हैं। लोगों ने इसे "दर्द में छुपी दोस्ती की सच्ची तस्वीर" बताया।
इस कहानी से क्या सीख मिलती है?
मित्रता केवल हँसी-खुशी के पल बाँटने तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसकी असली पहचान मुश्किल समय में निभाए गए वादों में होती है। अंबालाल प्रजापत ने अपने आचरण से यह साबित कर दिया कि एक सच्चा दोस्त वही है जो अंतिम वक्त तक साथ निभाए — चाहे दुनिया कुछ भी कहे।